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Watercolor illustration of three men at a tea stall during rain in a village.

Watercolor illustration of three men at a tea stall during rain in a village.

[संगीत] बरसात की एक शाम बख गंज गांव के दो लोग भोलू की चाय की दुकान पर बैठे हैं उनके चेहरों से साफ दिख रहा था कि वह लोग काफी उदास है आज जहां यह सभी लोग मिलके भोलू की चाय दो तीन कप पी जाते हैं वहां कोई आज एक कप चाय तक नहीं पिया हर कोई गांव की मौजूदा समस को लेकर बहुत विचलित है इसी बीच गांव की वर्तमान हेडमास्टर कैलाश उपा ब्या भोलू की चाय की दुकान पर आ [संगीत] पहुंचे अरे रामलाल माधव तुम लोग यहां इतना उदास होकर क्यों बैठे हुए हो मुझे इस गांव में आए हुए इतने दिन हो गए मैंने तो कभी तुम लोगों को इतना परेशान नहीं देखा हमेशा हंसते मुस्कुराते हुए ही देखा है लेकिन आज अचानक क्या हुआ आइए मास्टर जी बैठिए आपकी चाय तैयार है मास्टर जी मुझे पता था आप थोड़ी देर में यहां आ जाओगे हां हां बोलू आज अपनी वो अदरक वाली चाय पिलाना मुझे ठीक है बहुत देर से सर दद कर रहा है और हां तुम लोग बताए नहीं कि हुआ क्या है इतने उदास क्यों हो असल में क्या है ना मास्टर जी हम सभी लोगों का आज मन बहुत उदास है क्यों क्या हुआ इतने खूबसूरत गांव के लोगों के साथ घुलने मिलने से किसी का भी मन बेहतर हो जाएगा लेकिन उन्हीं लोगों को आज अचानक क्य हुआ आप तो जानते ही हो मास्टर जी कि हमारे गांव में कोई अस्पताल नहीं था कोई भी बीमार होता था तो उसको दो गांव पार 10 मील दूर जाना पड़ता था अस्पताल पहुंचने से पहले ही तो कितनों की मौत हो गई इसीलिए हम सभी मिलके अपने पैसे बचा के इस गांव में एक अस्पताल बनवाया लेकिन लेकिन लेकिन क्या हमारी सारी बचत खत्म हो गई अस्पताल तो तैयार है पर बिस्तर तो खरीदना बाकी रह गए हमारे पास तो और पैसे नहीं बचे अब क्या होगा ओ ऐसी बात है मेरे पास कुछ पैसे तो थे पर वह तो मेरी बेटी की शादी में खर्च हो गए हैं लेकिन हां इच्छापुर See more